राजू ठाकुर/निलेश धनकर✍…..
तखतपुर। नगर पालिका की नाक के नीचे करोड़ों की बेसकीमती सरकारी जमीन पर आरा मिल वाला खुलेआम लकड़ियों का पहाड़ खड़ा कर सीधा-सीधा कब्जा जमाए बैठा है। हालात ऐसे हैं कि देखने वाला भी समझ जाए कि यह जमीन सरकार की है, लेकिन उसका मालिकाना हक़ किसी और के पास चला गया है।

सबसे बड़ी बात-अगर नगर पालिका इस करोड़ों की जमीन पर दुकानें बनाकर नीलामी करे तो एक-एक दुकान लाखों में बिक सकती है, जिससे नगर की तिजोरी भर सकती है। लेकिन उल्टा हो रहा है… कमाई की जगह कब्जा बढ़ रहा है, और नगर पालिका तमाशबीन बनी बैठी है।

नगर पालिका का हाल यह है कि कार्रवाई की बात होते ही साहब निरीक्षण पर हैं, फाइल देख रहे हैं, टीम भेज रहे हैं—ऐसे बहाने हवा की तरह उड़ते रहते हैं। इस बीच कब्जा जंगल की आग की तरह फैलता जा रहा है। कहा जा रहा है कि नगर पालिका अगर इसी रफ़्तार से सोती रही तो जल्द ही तखतपुर में सरकारी जगहों का बोर्ड हटाकर लिखना पड़ेगा जिसकी जितनी ताकत, उसकी उतनी जमीन कब्जे का यह खुला खेल प्रशासन की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आख़िर नगर पालिका कब जागेगी, या फिर आरा मिल वाले की लकड़ी के नीचे व्यवस्था की हिम्मत ही दब चुकी है?
